Veer Kunwar Singh Foundation
pic

वीर कुंवर सिंह: कैसे कोई 80 साल की उम्र में वीर योद्धा बन सकता है'

3/21/2016 7:04:55 PM'

यह प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का वह दौर था जब इस संग्राम के प्रथम नायक बने मंगल पाण्डेय ने वर्ष 1857 में विद्रोह का बिगुल बजाया था. उसी समय जहां एक तरफ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों और ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ झांसी, कालपी और ग्वालियर में अपना अभियान छेड़ रखा था तो वहीं दूसरी तरफ  गुरिल्ला युद्ध प्रणाली के अग्रणी  योद्धा तात्या टोपे और नाना साहेब ग्वालियर, इंदौर, महू, नीमच, मंदसौर, जबलपुर, सागर, दमोह, भोपाल, सीहोर और विंध्य के क्षेत्रों में घूम-घूमकर विद्रोह का अलख जगाने में लगे हुए थे. वहीं पर एक और रणबांकुरा था जिसकी वीरगाथा आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का काम करती है.
भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हीरो रहे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह को एक  बेजोड़ व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जो 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने का माद्दा रखते थे. अपने ढलते उम्र और बिगड़ते सेहत के बावजूद भी उन्होंने कभी भी अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके बल्कि उनका डटकर सामना किया.
बिहार के शाहाबाद (भोजपुर) जिले के जगदीशपुर गांव में जन्मे कुंवर सिंह का जन्म 1777 में प्रसिद्ध शासक भोज के वंशजों में हुआ. उनके छोटे भाई अमर सिंह, दयालु सिंह और राजपति सिंह एवं इसी खानदान के बाबू उदवंत सिंह, उमराव सिंह तथा गजराज सिंह नामी जागीरदार रहे.
बाबू कुंवर सिंह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह जिला शाहाबाद की कीमती और अतिविशाल जागीरों के मालिक थे. सहृदय और लोकप्रिय कुंवर सिंह को उनके बटाईदार बहुत चाहते थे. वह अपने गांववासियों में लोकप्रिय थे ही साथ ही अंग्रेजी हुकूमत में भी उनकी अच्छी पैठ थी. कई ब्रिटिश अधिकारी उनके मित्र रह चुके थे लेकिन इस दोस्ती के कारण वह अंग्रेजनिष्ठ नहीं बने.
1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाबू कुंवर सिंह की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी. अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर कदम बढ़ाया. मंगल पाण्डे की बहादुरी ने सारे देश को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा किया. ऐसे हालात में बाबू कुंवर सिंह ने भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया. उन्होंने 27 अप्रैल, 1857 को दानापुर के सिपाहियों, भोजपुरी जवानों और अन्य साथियों के साथ मिलकर आरा नगर पर कब्जा कर लिया. इस तरह कुंवर सिंह का अभियान आरा में जेल तोड़ कर कैदियों की मुक्ति तथा खजाने पर कब्जे से प्रारंभ हुआ.
कुंवर सिंह ने दूसरा मोर्चा बीबीगंज में खोला जहां दो अगस्त, 1857 को अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए. जब अंग्रेजी फौज ने आरा पर हमला करने की कोशिश की तो बीबीगंज और बिहिया के जंगलों में घमासान लड़ाई हुई. बहादुर स्वतंत्रता सेनानी जगदीशपुर की ओर बढ़ गए. अंग्रजों ने जगदीशपुर पर भयंकर गोलाबारी की. घायलों को भी फांसी पर लटका दिया. महल और दुर्ग खंडहर कर दिए. कुंवर सिंह पराजित भले हुए हों लेकिन अंग्रेजों का खत्म करने का उनका जज्बा ज्यों का त्यों था. सितंबर 1857 में वे रीवा की ओर निकल गए वहां उनकी मुलाकत नाना साहब से हुई और वे एक और जंग करने के लिए बांदा से कालपी पहुंचे लेकिन लेकिन सर कॉलिन के हाथों तात्या की हार के बाद कुंवर सिंह कालपी नहीं गए और लखनऊ आए.
इस बीच बाबू कुंवर सिंह रामगढ़ के बहादुर सिपाहियों के साथ बांदा, रीवां, आजमगढ़, बनारस, बलिया, गाजीपुर एवं गोरखपुर में विप्लव के नगाड़े बजाते रहे. लेकिन कुंवर सिंह की यह विजयी गाथा ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी और अंग्रेजों ने लखनऊ पर पुन: कब्जा करने के बाद आजमगढ़ पर भी कब्जा कर लिया. इस बीच कुंवर सिंह बिहार की ओर लौटने लगे. जब वे जगदीशपुर जाने के लिए गंगा पार कर रहे थे तभी उनकी बांह में एक अंग्रेजों की गोली आकर लगी. उन्होंने अपनी तलवार से कलाई काटकर नदी में प्रवाहित कर दी. इस तरह से अपनी सेना के साथ जंगलों की ओर चले गए और अंग्रेज़ी सेना को पराजित करके 23 अप्रैल, 1858 को जगदीशपुर पहुंचे. वह बुरी तरह से घायल थे. 1857 की क्रान्ति के इस महान नायक का आखिरकार अदम्य वीरता का प्रदर्शन करते हुए 26 अप्रैल, 1858 को निधन हो गया.
'


  • author
    Teenu

    3/22/2016 2:49:09 PM

    today i got the information about veer kunwar singh

    Reply
  • author

    4/3/2018 2:12:03 AM

    Reply
  • author
    Judi

    5/12/2018 10:37:41 AM

    2rand[0,1,1]

    Reply
  • author
    pDkbBRfyEWHe

    8/9/2019 8:40:05 PM

    edDnSyIYCxaw

    Reply
  • author
    UfGEPcQrLhOd

    9/21/2019 7:48:34 AM

    zgupTkSDfLFE

    Reply
  • author
    csFTWwNOueHrYP

    10/20/2019 3:48:25 PM

    AIqGHdMDswW

    Reply
  • author
    SlmqLvDTfAeXw

    10/20/2019 3:48:25 PM

    sQGhjVliEMkHYILT

    Reply
  • author
    uaiUdERXNQKGj

    11/8/2019 11:17:16 AM

    iSUtjcPEwJzyNk

    Reply
  • author
    jEUhLHbNaGBAPrV

    11/8/2019 11:17:18 AM

    mVGduIyDgehHcM

    Reply
  • author
    SiNrDhmLFVdC

    12/14/2019 3:04:52 PM

    KEpgRkMZlbqv

    Reply
  • author
    kIMETRCGyH

    12/14/2019 3:04:54 PM

    iSkrhQmLUnpRBAwb

    Reply
  • author
    GJjktgucBqPraZ

    2/8/2020 9:39:40 AM

    mXPAjuBLzYMES

    Reply
  • author
    HDnLadCQX

    2/8/2020 9:39:42 AM

    VONrmugcSUyY

    Reply
  • author
    fSPkQqsJyhxpEUR

    2/24/2020 1:02:08 PM

    DLYTJmEaWsBn

    Reply
  • author
    ZLaijhRl

    2/24/2020 1:02:09 PM

    NZFhqlxrOKCkG

    Reply

Leave Reply

  • *Your Email will never published.

Events

Veer Kunwar Singh Foundation

23 April 2019

आमंत्रण-:मंगलवार,4 बजे,23 अप्रैल 2019 वीर कुँवर सिंह का 162 वां विजयोत्सव समारोह आयोजन का २२वाँ वर्ष। वीर कुँवर सिंह फॉउन्डेशन द्वारा आयोजित" प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 के महानायक वीर कुँवर सिंह विजयोत्सव समारोह के नई दिल्ली मे लगातार आयोजन के 22 वें वर्ष मेआप सादर आमन्त्रित हैं। " समय-: सायं 4बजे, दिनांक-: मंगलवार, 23 अप्रैल 2019 स्थान-: कांस्टीट्यूशन क्लब,रफी मार्ग,नई दिल्ली। (संसद भवन एवं सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन के पास) निवेदक-: निर्मल कुमार सिंह,अध्यक्ष ,वीर कुँवर सिंह फॉउन्डेशन ,नई दिल्ली। 9810659729,+91 94 31 857913,+918860966743, 094314 50279 email-:virkunwarsinghfoundation@gmail.com Web:www.veerkunwarsingh.com

  • 23 April 2019
    समारोह सायं 4.00 बजे, 23 अप्रैल 2019
  • नई दिल्ली

Facebook

©2016 Veer Kunwar Singh Foundation All rights reserved. Developed By Kundal Singh